DUSU Election Result 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 की मतगणना के दौरान उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने मजबूत बढ़त बनाई। मतगणना के 10वें राउंड तक शौकीन को 15,601 वोट मिल चुके थे और वह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से काफी आगे चल रहे थे। बढ़त के बीच दीपांशु शौकीन ने छात्रों और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना आसान नहीं था, लेकिन छात्रों ने उन पर भरोसा जताया।
दीपांशु ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं बल्कि उन विद्यार्थियों की है जो कैंपस के वास्तविक मुद्दों को सामने रखना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है तथा वह छात्रों की आवाज उठाने की कोशिश करेंगे।
DUSU उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु की बड़ी बढ़त
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के चार केंद्रीय पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—के लिए 19 सितंबर 2026 को मतगणना शुरू हुई। शुरुआती दौर से ही उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन बढ़त बनाए हुए थे।
मतगणना के 12वें राउंड तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दीपांशु शौकीन को 18,933 वोट मिले थे, जबकि ABVP के ईशू मौर्य को 9,653 और NSUI के वीर चतरथ को 4,515 वोट मिले थे। इस स्तर पर शौकीन की बढ़त काफी स्पष्ट थी, हालांकि उस समय मतगणना पूरी नहीं हुई थी।
यही वजह है कि कई रिपोर्टों में दीपांशु शौकीन को उपाध्यक्ष पद पर जीत की ओर बढ़ता हुआ बताया गया। अंतिम परिणाम के लिए पूरी मतगणना और आधिकारिक घोषणा जरूरी होती है।
दीपांशु शौकीन ने क्या कहा?
बढ़त के बीच दीपांशु शौकीन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन छात्रों ने उनके पक्ष में भरोसा दिखाया।
उनकी प्रतिक्रिया का मुख्य संदेश छात्र मुद्दों पर केंद्रित था। उन्होंने कहा कि यह जीत उन विद्यार्थियों की है जो कैंपस में वास्तविक समस्याओं और मुद्दों को उठाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के बाद उनकी जिम्मेदारी पहले से अधिक बड़ी हो गई है।
इस बयान के बाद उनके समर्थकों में उत्साह देखा गया। हालांकि, चुनावी परिणामों की औपचारिक पुष्टि मतगणना पूरी होने और विश्वविद्यालय की आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाती है।
कौन हैं दीपांशु शौकीन?
दीपांशु शौकीन की चुनावी कहानी इस बार इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में DUSU उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, शौकीन पहले NSUI से टिकट की मांग कर चुके थे। उनका नामांकन भी हुआ था, लेकिन संगठन की ओर से नामांकन वापस लेने को कहा गया। इसके बाद उन्होंने नामांकन वापस लेने से इनकार किया और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में बने रहे।
रिपोर्ट के अनुसार दीपांशु दिल्ली के पीरागढ़ी गांव से आते हैं। उनके पिता बस कंडक्टर और मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने भगत सिंह कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज में अध्ययन किया।
छात्र राजनीति में सक्रियता कैसे बढ़ी?
दीपांशु शौकीन की छात्र राजनीति में सक्रियता का एक संदर्भ सत्य निकेतन हादसे से भी जुड़ा है। NDTV के अनुसार, सत्य निकेतन हादसे के बाद उन्होंने छात्रों को न्याय मिलने तक जूते नहीं पहनने का संकल्प लिया था। इसके बाद कैंपस में उनकी सक्रियता बढ़ी।
DUSU चुनाव में उनका निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरना भी चर्चा का विषय बना। छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के बीच चुनाव लड़ने के बजाय स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने से उनकी चुनावी रणनीति अलग दिखाई दी।
DUSU चुनाव में मतदान प्रतिशत कितना रहा?
DUSU चुनाव 2026 में कुल 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह पिछले वर्ष के 39.45 प्रतिशत मतदान से लगभग 1.01 प्रतिशत अधिक था। दिल्ली विश्वविद्यालय के 52 कॉलेजों और विभागों में मतदान केंद्र बनाए गए थे।
मतदान के दौरान छात्रों के बीच हॉस्टल, PG का किराया, आवास की उपलब्धता, सुरक्षा और आने-जाने की लागत जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे। सत्य निकेतन में हालिया PG भवन हादसे के कारण छात्र आवास और सुरक्षा से जुड़े सवाल भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बने।
अध्यक्ष पद पर बदलता रहा मुकाबला
DUSU चुनाव के अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच मुकाबला लगातार बदलता रहा। अलग-अलग राउंड में दोनों उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई।
12वें राउंड के बाद उपलब्ध आंकड़ों में NSUI के विजय शंकर मीणा 14,530 वोटों के साथ आगे थे, जबकि ABVP के यश डबास को 14,106 वोट मिले थे। वहीं उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन 18,933 वोटों के साथ अपनी बढ़त बनाए हुए थे।
इससे साफ है कि DUSU के अलग-अलग पदों पर मतगणना के दौरान तस्वीर एक जैसी नहीं रही और कई पदों पर मुकाबला राउंड-दर-राउंड बदलता रहा।
मतगणना केंद्र पर कड़ी सुरक्षा
DUSU चुनाव की मतगणना को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, 2,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया। मतगणना केंद्र के आसपास आवाजाही को नियंत्रित किया गया और प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई गई।
मतगणना दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के बहुउद्देश्यीय हॉल में हुई। अधिकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से मतगणना और परिणाम घोषित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूस पर लगाई रोक
DUSU चुनाव परिणामों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकालने और सार्वजनिक तौर पर जश्न के प्रदर्शन पर रोक लगाई। अदालत ने चुनाव प्रचार के दौरान कथित नियम उल्लंघन, वाहनों के काफिले और अन्य मामलों को लेकर भी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।
इस निर्देश के चलते चुनाव परिणाम आने के बाद कैंपस और आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।
निर्दलीय उम्मीदवार के प्रदर्शन ने खींचा ध्यान
DUSU चुनाव में दीपांशु शौकीन की बढ़त इसलिए भी उल्लेखनीय रही क्योंकि वह किसी प्रमुख छात्र संगठन के टिकट पर नहीं बल्कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थे। शुरुआती राउंड से ही उन्होंने उपाध्यक्ष पद पर बढ़त बनाई और बाद के राउंड में भी अंतर बढ़ता गया।
उनके प्रदर्शन को लेकर छात्र राजनीति में अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी हुईं। हालांकि किसी चुनावी नतीजे के व्यापक राजनीतिक अर्थ निकालने से पहले अंतिम परिणाम और संबंधित छात्र मतदाताओं के मुद्दों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
अब आगे क्या?
मतगणना के अंतिम चरण के बाद DUSU के चारों केंद्रीय पदों के आधिकारिक परिणाम स्पष्ट होने थे। उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की मजबूत बढ़त के कारण उनका नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा।
यदि अंतिम परिणाम भी मतगणना के रुझानों के अनुरूप रहता है, तो एक निर्दलीय उम्मीदवार का DUSU केंद्रीय पैनल में उपाध्यक्ष पद हासिल करना छात्र राजनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा। हालांकि, अंतिम पुष्टि आधिकारिक परिणाम से ही होगी।
निष्कर्ष
DUSU Election Result 2026 में निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन उपाध्यक्ष पद पर लगातार मजबूत बढ़त बनाते नजर आए। 10वें राउंड तक उन्हें 15,601 वोट मिल चुके थे और 12वें राउंड तक उनका आंकड़ा 18,933 वोट तक पहुंच गया। इसी दौरान उन्होंने छात्रों और समर्थकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि निर्दलीय होकर चुनाव लड़ना आसान नहीं था, लेकिन विद्यार्थियों ने भरोसा जताया।
DUSU चुनाव में उनका प्रदर्शन इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि उन्होंने किसी प्रमुख छात्र संगठन के टिकट के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। अब सभी की नजर आधिकारिक अंतिम परिणाम और विश्वविद्यालय की ओर से जारी होने वाली पुष्टि पर है।










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