यूपी में 3095 करोड़ से बनेंगी 36 सड़कें, कई जिलों को फायदा | UP News 2026

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सड़क और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। प्रदेश में 36 सड़क परियोजनाओं के लिए 3095 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति दी गई है। ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रस्तावित हैं। अब लोक निर्माण विभाग यानी PWD इन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

सरकार की ओर से दी गई मंजूरी दो अलग-अलग बैठकों में हुई। अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठकों में इन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। स्वीकृत परियोजनाओं की लागत अलग-अलग है और कुछ बड़ी परियोजनाओं के लिए आगे कैबिनेट की मंजूरी भी आवश्यक होगी।

36 सड़क परियोजनाओं पर 3095 करोड़ से ज्यादा खर्च

व्यय वित्त समिति की दो बैठकों में कुल 36 सड़क परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति मिली है। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 3095 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। परियोजनाओं की व्यक्तिगत लागत लगभग 25 करोड़ रुपये से लेकर 665 करोड़ रुपये तक बताई गई है।

इस मंजूरी के बाद सड़क निर्माण से संबंधित प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। लोक निर्माण विभाग इन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यानी वित्तीय स्वीकृति के बाद अब निर्माण एजेंसी के चयन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर काम आगे बढ़ेगा।

10 सितंबर की बैठक में 21 परियोजनाओं को मंजूरी

व्यय वित्त समिति की 10 सितंबर 2026 को हुई बैठक में PWD की कुल 21 सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इन परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों के जिले शामिल हैं।

इनमें सीतापुर की दो, मीरजापुर की एक, देवरिया की दो, महाराजगंज की एक, सोनभद्र की पांच, बांदा की एक, वाराणसी की एक, चित्रकूट की दो, झांसी की एक, लखनऊ की दो, लखीमपुर खीरी की एक और संभल की एक सड़क परियोजना शामिल है।

इस सूची से स्पष्ट है कि सड़क परियोजनाओं का दायरा केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। पूर्वी, मध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के कई जिलों में प्रस्तावित सड़क कार्यों को इस वित्तीय मंजूरी में शामिल किया गया है।

17 सितंबर को 15 और सड़क परियोजनाओं को मंजूरी

इसके बाद 17 सितंबर 2026 को हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में 15 और सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें गोरखपुर की तीन, गोंडा की छह, एटा की एक, सीतापुर की एक, सोनभद्र की एक, देवरिया की एक और वाराणसी की दो परियोजनाएं शामिल हैं।

इस तरह 10 और 17 सितंबर की दोनों बैठकों को मिलाकर कुल 36 सड़क परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति मिली है। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और संबंधित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

200 करोड़ से ज्यादा वाली परियोजनाओं पर कैबिनेट की मंजूरी जरूरी

सभी परियोजनाओं की प्रक्रिया एक जैसी नहीं होगी। व्यय वित्त समिति से स्वीकृत जिन परियोजनाओं की लागत 200 करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें आगे कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इसलिए वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद भी बड़ी परियोजनाओं के लिए अगला प्रशासनिक चरण पूरा होना बाकी है।

वहीं, अन्य स्वीकृत परियोजनाओं के लिए लोक निर्माण विभाग टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद चयनित एजेंसी और परियोजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?

नई सड़क परियोजनाओं की सूची में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के जिले शामिल हैं। गोरखपुर और देवरिया जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों के अलावा गोंडा, सीतापुर, वाराणसी और सोनभद्र में भी कई परियोजनाओं को मंजूरी मिली है।

इसके अलावा लखनऊ, झांसी, चित्रकूट, बांदा, मीरजापुर, महाराजगंज, लखीमपुर खीरी, संभल और एटा जैसे जिलों में भी सड़क निर्माण से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।

सड़क निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में आवागमन, स्थानीय कनेक्टिविटी और परिवहन व्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि किसी परियोजना का वास्तविक लाभ उसके निर्माण की गति, गुणवत्ता और निर्धारित समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगा।

सड़क परियोजनाओं के साथ अन्य विकास कार्यों को भी मंजूरी

व्यय वित्त समिति की बैठकों में केवल सड़क परियोजनाओं को ही मंजूरी नहीं दी गई। रिपोर्टों के अनुसार, मेडिसिन स्टोर और कूलिंग रूम सहित चार पशु चिकित्सालय, एक ब्लॉक स्तरीय पशु चिकित्सालय और एक प्राथमिक पशु चिकित्सालय के निर्माण की परियोजनाओं को भी वित्तीय स्वीकृति मिली है।

इसके अलावा फर्रूखाबाद में जिला ग्राम्य विकास संस्थान के आवासीय और अनावासीय भवन, तथा मथुरा और सोनभद्र में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय से जुड़ी परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।

बीडा से जुड़ी 10 परियोजनाओं को भी मंजूरी

अवस्थापना और औद्योगिक विकास से जुड़ी योजनाओं के तहत भी कई परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर देहात, प्रयागराज, फतेहपुर, हमीरपुर और झांसी में बीडा के विकास से संबंधित 10 परियोजनाएं भी इस मंजूरी में शामिल हैं।

इससे संकेत मिलता है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ औद्योगिक और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं को भी आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है।

विधानसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच सड़क परियोजनाओं को मिली यह वित्तीय मंजूरी राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है। कुछ रिपोर्टों ने इसे चुनाव से पहले सरकार की विकास संबंधी तैयारियों से जोड़कर देखा है। वहीं आधिकारिक रूप से उपलब्ध जानकारी का मुख्य तथ्य यह है कि 36 सड़क परियोजनाओं के लिए 3095 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति दी गई है और PWD आगे टेंडर प्रक्रिया की तैयारी कर रहा है।

किसी परियोजना के राजनीतिक प्रभाव का आकलन अलग विषय है। फिलहाल इन परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि टेंडर, भूमि संबंधी प्रक्रिया, निर्माण और अन्य प्रशासनिक कार्य कितनी तेजी से पूरे होते हैं।

आगे क्या होगा?

अब अगला महत्वपूर्ण चरण टेंडर प्रक्रिया है। PWD द्वारा परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी किए जाने के बाद निर्माण एजेंसी का चयन किया जाएगा। 200 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को कैबिनेट के समक्ष भी प्रस्तुत किया जाना है।

इसके बाद निर्माण कार्य की समयसीमा और गुणवत्ता की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। आम लोगों के लिए परियोजनाओं का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब सड़कें निर्धारित मानकों के अनुसार समय पर बनें और उनका रखरखाव भी सुनिश्चित हो।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में 36 सड़क परियोजनाओं के लिए 3095 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय मंजूरी राज्य के सड़क बुनियादी ढांचे से जुड़ा बड़ा फैसला है। 10 सितंबर की बैठक में 21 और 17 सितंबर की बैठक में 15 परियोजनाओं को मंजूरी मिली। इन परियोजनाओं में लखनऊ, गोरखपुर, गोंडा, सीतापुर, सोनभद्र, वाराणसी, देवरिया, झांसी सहित कई जिलों को शामिल किया गया है।

अब इन परियोजनाओं की आगे की प्रक्रिया टेंडर और आवश्यक प्रशासनिक मंजूरियों पर निर्भर करेगी। बड़ी परियोजनाओं के लिए कैबिनेट की मंजूरी भी जरूरी होगी। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वीकृत सड़क परियोजनाओं का निर्माण कब शुरू होता है और इन्हें निर्धारित समय में किस तरह पूरा किया जाता है।

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